Purpose

हमारा उद्देश्य

लक्ष्य

नवाचार, पर्यावरण और संपोषणीयता पर बल देने के साथ बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण के लिए प्रमुख प्रवर्तक बनना

दूरदृष्टि

भारत के परिवर्तनकारी विकास के लिए अवसंरचना निधिकरण में तेजी और प्रभावी निवेश का वैश्विक मान्यता प्राप्त सुदृढ़ प्रदाता बनना

हमारी विचारधारा

नैबफिड की स्थापना के पीछे मुख्य विचार भारत के अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तपोषण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक समर्पित और विशेषीकृत संस्थान प्रदान करना है। हमारा उद्देश्य अधिनियम में उल्लिखित सक्षम प्रावधानों, विशेष प्रतिभा, मजबूत तकनीकी क्षमताओं और सुदृढ़ शासन व्यवस्था का लाभ उठाकर इसे साकार करना है। नैबफिड अभिनव वित्तपोषण साधनों के विकास तथा गहरे बांड और डेरिवेटिव बाजारों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे अवसंरचना वित्तपोषण को और समर्थन मिलेगा तथा वित्तपोषण में सर्वोत्तम प्रथाओं और डेटा-आधारित जोखिम प्रबंधन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

अवसंरचना का विकास आर्थिक वृद्धि और विकास का एक महत्वपूर्ण प्रेरक है, और बड़े पैमाने की अवसंरचना परियोजनाओं के समय पर तथा कुशल क्रियान्वयन के लिए वित्तपोषण का एक विश्वसनीय स्रोत अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से, नैबफिड का लक्ष्य भारत की महत्वाकांक्षी अवसंरचना विकास योजनाओं को जिम्मेदारीपूर्वक और सतत रूप से प्राप्त करने में एक प्रमुख भागीदार बनना है।

नैबफिड का महत्व

भारत की अर्थव्यवस्था अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सतत वृद्धि का अनुभव कर रही है। अपने 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि अगले 5 वर्षों में अवसंरचना निवेश प्रति वर्ष 8–10% की दर से बढ़े। इस दिशा में भारत सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महत्वाकांक्षी नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लान (एनआईपी) के तहत 8,900 विभिन्न अवसंरचना परियोजनाओं में ₹146 लाख करोड़ के निवेश का प्रावधान किया गया है।

हालाँकि, आवश्यक वृद्धि और विकास लक्ष्यों को सुनिश्चित रूप से प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास की आवश्यकता है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ अधिक जोखिम लेने की क्षमता, संतुलित एसेट-लायबिलिटी प्रबंधन (एएलएम) समाधान, और एक गहरा बांड बाजार स्थापित करना शामिल है। उपयुक्त और आकर्षक वित्तीय साधनों के माध्यम से अवसंरचना निवेश के लिए वर्तमान में उपलब्ध 230 अरब अमेरिकी डॉलर के क्रेडिट पूल का प्रभावी और व्यवस्थित रूप से उपयोग किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, अवसंरचना वित्तपोषण के मूल्यांकन और निगरानी के लिए विशेष विशेषज्ञता, मजबूत वित्तीय स्थिति तथा विवेकपूर्ण क्रेडिट एन्हांसमेंट भारत में निजी ऋण प्रणाली को स्पष्ट रूप से सुदृढ़ कर सकते हैं, जिससे ऊर्जा और दूरसंचार से आगे के अन्य क्षेत्रों के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं।

 

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुमान के अनुसार ₹150 करोड़ से अधिक लागत वाली 470 से अधिक अवसंरचना परियोजनाएँ वर्तमान में लागत वृद्धि और समय में देरी से प्रभावित हैं। प्रभावी परियोजना निगरानी और विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रणालियों के कार्यान्वयन के माध्यम से इन परियोजनाओं का प्रबंधन उल्लेखनीय रूप से बेहतर किया जा सकता है।

इस प्रकार नैबफिड का महत्व इस बात में निहित है कि इसमें अवसंरचना वित्तपोषण के क्षेत्र में इन उद्देश्यों की पूर्ति करने और वित्त का एक अधिक स्थिर स्रोत प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है। यह न केवल आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि परियोजनाओं के पूरे जीवनचक्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के माध्यम से देश में अवसंरचना विकास की दक्षता और पारदर्शिता को भी बेहतर बनाएगा।

नैबफिड अवसंरचना वित्तपोषण के लिए बांड, ऋण और डेरिवेटिव के एक गहरे और तरल (लिक्विड) बाजार के विकास की दिशा में भी कार्य करेगा। यह विशेष रूप से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक और नेगोशिएटेड बाजारों के विकास को सुगम बनाएगा, जिससे निष्पक्ष और सुलभ व्यापार तथा विनिमय संभव हो सकेगा।

अंततः, नैबफिड की स्थापना से भारतीय अर्थव्यवस्था को कई व्यापक लाभ मिलने की अपेक्षा है। व्यापक स्तर पर अवसंरचना वित्तपोषण को बढ़ावा देने से देश में समग्र निवेश वातावरण में सुधार होगा और इस क्षेत्र में निजी तथा विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तपोषण के लिए अधिक आकर्षक और व्यवहार्य विकल्प उपलब्ध होंगे।

नैबफिड भारत को अपनी चुनौतीपूर्ण अवसंरचना लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इस क्षेत्र के विकास का समर्थन करने के लिए आवश्यक वित्त, विशेषज्ञता, तकनीक और विश्लेषणात्मक क्षमता प्रदान करके।